عشق گنجی ست، دل چو ویرانه/
عشق شمعی ست، روح پروانه/
در بیابان عشق میگردد/
روح مدهوش و عقل دیوانه/
دست تا در نزد به دامن عشق/
ره به منزل نبرد فرزانه/
خرم آن عارفان که دنیا را/
پشت پائی زدند مردانه/
آدم از دانه اوفتاده به دام/
آه از این دام وای از آن دانه/
عمر در باختیم تا اکنون/
گه به افسون و گه به افسانه/
بعد از امروز گر به دست آریم/
دامن یار و کنج میخانه/
با مغان بادهٔ مغانه خوریم/
تا به کی غصهٔ زمانه خوریم/
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عبید زاکانی
عشق شمعی ست، روح پروانه/
در بیابان عشق میگردد/
روح مدهوش و عقل دیوانه/
دست تا در نزد به دامن عشق/
ره به منزل نبرد فرزانه/
خرم آن عارفان که دنیا را/
پشت پائی زدند مردانه/
آدم از دانه اوفتاده به دام/
آه از این دام وای از آن دانه/
عمر در باختیم تا اکنون/
گه به افسون و گه به افسانه/
بعد از امروز گر به دست آریم/
دامن یار و کنج میخانه/
با مغان بادهٔ مغانه خوریم/
تا به کی غصهٔ زمانه خوریم/
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عبید زاکانی
(ओबैद जाकानी हाफिज के समकालीन कवि हैं। इनकी प्रसिद्धि व्यङ्ग्यकार के रूप में अत्यधिक है।)
प्रेम एक निधि है, और दिल वीराना है
प्रेम एक दीपक है, और आत्मा पतङ्ग है
प्रम के बयाबान में भटकते हैं,
आत्मा मस्त होकर औेर बुद्धि पागल होकर.
जब तक हाथ में प्रेम का दामन नहीं आया,
कोई भी होशियार मञ्जिल तक नहीं पहुंचा.
धन्य हैं वे पण्डित जिन्होंने दुनिया को
पैर के नीचे रखा, मर्दों की तरह
आदम गेहूं के एक दाने के नाते जाल में फंसा,
हाय ये जाल , हाय वो दाना
अभी तक हम अपनी उम्र को जुये में हारते गये हैं,
कभी जादू में , कभी कहानियों में फंस कर
आज के बाद से भी काश अगर हमारे हाथ आ पाये
यार का दामन और मदिरालय का कोना
काश मुगों (ब्रह्मानन्दियों) के साथ बैठकर उनकी तरह शराब पियें
आखिर कब तक दुनियां के कष्टों की चिन्ता करें
