गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

आत्मदीपो भव........


मौलाना जलालुद्दीन रूमी....

ای سنایی گر نیابی یار یار خویش باش در جهان هر مرد و کاری مرد کار خویش باش

هر یکی زین کاروان مر رخت خود را رهزنند خویشتن را پس نشان و پیش بار خویش باش

حس فانی می دهند و عشق فانی می خرند زین دو جوی خشک بگذر جویبار خویش باش

می کشندت دست دست این دوستان تا نیستی دست دزد از دستشان و دستیار خویش باش

این نگاران نقش پرده آن نگاران دلند پرده را بردار و دررو با نگار خویش باش

با نگار خویش باش و خوب خوب اندیش باش از دو عالم بیش باش و در دیار خویش باش

رو مکن مستی از آن خمری کز او زاید غرور غره آن روی بین و هوشیار خویش باش



ऐ सनाई गर नयाबी यार यारे खीश बाश

दर जहान् हर मर्द ओ कारी मर्दे कारे खीश

हर यकी जीन कारवान मर रख्ते खुद रा रहजनन्द

खीशतन रा पस निशानो पीशे बारे खीश बाश

हिस्से फानी मी दहन्दो इश्के फानी मी खरन्द

जीन दो जूये खुश्क बुग्जर जूयेबारे खीश बाश

मी कशन्दत दस्त दस्त ईन दूस्तान ता नीस्ती

दस्त दुज्द अज् दूस्तानो दस्तयारे खीश बाश

ईन निगारान नक्शे पर्दे आन निगाराने दिलन्द

पर्दे रा बर दारो दर रौ बा निगारे खीश बाश

बा निगारे खीश बाशो खूबे खूब अन्दीश बाश

अज दो आलम बीश बाशो दर दियारे खीश बाश

रौ मकुन मस्ती अजान मस्ती कजू जायद गरूर

गर्रे आन रूयी बेदीनो होशियारे खीशे बाश

इश्क और अक्ल....


दर मियाने पर्देये खून इश्क रा गुलजार –हा
आशिकान् रा बा जमाले इश्क बी चून् कार हा

अक्ल गूयद शिश जहत हद्द स्तो बीरून राह नीस्त
इश्क गूयद राह हस्तो रफ्ते अम मन बार हा

अक्ल बाजारी बेदीदो ताजिरी आगाज कर्द
इश्क दीदे जान् सुये बाजारे ऊ बाजार हा

ऐ बसा मन्सूरे पिन्हान् ज् ऐतिमादे जाने इश्क
तर्के मिम्बर हा बेगुफ्ते बर शुदे बर दार हा

आशिकाने दर्दकिश रा दर दरूने जौक हा
आकिलाने तीरेदिल रा दर दरून इन्कार हा


अक्ल गूयद पा मनेह कऽन्दर फना जुज खार नीस्त
शम्से तबरीजी तुई खुर्शीद अन्दर अब्रे हर्फ

चून् बरामद आफताबत मह्व शुद गुफ्तार हा





तर्क कहता है दिशाओं के परे मार्ग नहीं है...
...प्रेम कहता है कि है.....और मैं कई बार गया भी हूं...



{मौलाना जलालुद्दीन रूमी}

दिलम दर आशिकी........



http://www.youtube.com/watch?v=Ue76H_7BIy8


dilam dar aashiqui aawareh shud aawareh tar badaatanam az bedillee beechareh shud beechareh tar badaa...


दिलम दर आशिकी आवारा शुद आवारातर बादातनम दर बेदिली बेचारा शुद बेचारातर बादा





م در عاشقی آواره شد آواره تر بادا




تنم در بیدلی بیچاره شد بیچاره تر بادا.......




अर्थात्.......


मेरा हृदय प्रेम में आवारा है..... और आवारा हो जाये

..मेरा तन विरह में बेचारा है....और बेचारा हो जाये......


تنم از بي‌دلي بيچاره شد بيچاره تر بادا دلم در عاشقي آواره شد آواره تر بادا
به خونريز غريبان چشم تو عياره تر بادا به تاراج عزيزان زلف تو عياريي دارد
دلت خاره‌ست و بهر کشتن من خاره تر بادا رخت تازه است و بهر مردن خود تازه تر خواهم
که آن آواره‌ي از کوي بتان آواره تر بادا گراي زاهد دعاي خير ميگويي مرا اين گو
من اين گويم که بهرجان من خون خواره تر بادا همه گويند کز خون‌خواريش خلقي بجان آمد
و گر جانان بدين شادست يا رب پاره تر بادا دل من پاره گشت از غم نه زان گونه که به گردد
به آب چشم پاکان دامنش همواره تر بادا چو با تردامني خو کرد خسرو با دو چشم تر

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