गुरुवार, 10 मई 2012

शैखे सय्याद.....


اگرچه سبحه ی صد دانه دارد 


دلم از شیخ صیاد است هشیار







अगर्चे सुब्हे ये सद् दाने दारद 
दिलम अज् शेखे सय्यादस्त हुश्यार







(यद्यपि उसके पास सौ दानों वाली माला है लेकिन मेरे दिल का पंछी





फिर भी शेख रूपी बहेलिये से होशियार है)

1 टिप्पणी: